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mangalveena


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आपदाओं के भँवर में फँसती मानवता

Posted On: 12 Oct, 2017  
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किसान भी बदल गए

Posted On: 5 Jul, 2017  
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एक अशिष्ठता का अवसान

Posted On: 8 Jun, 2017  
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कर्मयोगी से योगी तक

Posted On: 4 Apr, 2017  
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विकास कि बकवास

Posted On: 21 Dec, 2016  
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सर्जिकल स्ट्राइक कि बोरोप्लस

Posted On: 1 Dec, 2016  
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दीपावली

Posted On: 28 Oct, 2016  
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हिंदी के साथ पखवारे का छल

Posted On: 23 Sep, 2016  
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कश्मीर पर ऊहापोह

Posted On: 12 Aug, 2016  
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न्यायाधीश जी ,बातें कुछ और भी

Posted On: 29 Apr, 2016  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: mangalveena mangalveena

के द्वारा: kamleshmaurya kamleshmaurya

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

जय श्री राम मंगलवीनाजी आपने बहुत सुन्दर और तथ्यों से पूर्ण लेख लिखा ऐसा बहुत दिनों बाद पढने को मिला है भारत और हिन्दुओ की सहिष्णुता की वजह से विदेशी आक्रमणकारी यह राज्य स्थापित कर सके और यही हमारी कमजोरी भी है आज भी मुस्लिम अकाद के रहते जबकि हिन्दू दबे हुए ये असहिष्णुता का नाटक मोदी जी की सर्कार को अश्थिर करने की साजिस थी जिसमे चर्च भी शामिल है हार्दिक पटेल और चर्च पर चोरी की घटने को बड़ा चला कर हाला मचाना तथा संसद को रोकना कांग्रेस और सेचुलारिस्तो की मिली भगत है इस के लिए सरकार के साथ हम लोगो को भी अक्र्मंकारी बनना पड़ेगा असहिष्णुता है तोआसाम ,केरल,बंगाल,उत्तरार प्रदेश और कर्णाटक राज्यों में है कारन्त में प्रशांत पुजारी पर चुप क्यों?इस सुन्दर लेख के लिए हार्दिक बधाई. 

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

महात्मा जी की अगुआई में हुई जनजागृति ने हमें स्वतंत्र भारत दिया परन्तु स्वच्छ भारत का स्वप्न वर्षों से स्वप्न बना रहा। अब दूसरी जन जाग्रति ने वर्तमान सरकार की अगुआई में हमें स्वच्छ भारत देने की ठान ली है। अतः अपनी -अपनी भूमिका निभाते हुए स्वच्छ भारत अभ्युदय का उत्सव मनाना चाहिए। स्वतंत्र भारत का स्वच्छ भारत होना महात्मा की पुनीत जयन्ती पर उन्हें सर्वाधिक प्रिय श्रद्धांजलि होगी। यह झाड़ू की ही बलिहारी है कि स्वच्छ भारत अवतरित हो रहा है। बुहारी तेरे दिन बार बार बहुरे। आदरणीय मंगल वीणा जी,इस सार्थक,विचारणीय व व्यंग्यमय लेख के सृजन के लिए और 'बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक' चुने जाने के लिए बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई-सद्गुरुजी !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: mangalveena mangalveena

के द्वारा: शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति" शिल्पा भारतीय "अभिव्यक्ति"

के द्वारा: mangalveena mangalveena

के द्वारा: mangalveena mangalveena

निर्विवाद सचिन ने करोड़ों भारतीयों का वर्षों तक बेजोड़ मनोरंजन किया । इसके लिए उन्हें साधुवाद । भारतीय समाज एवं राजनीतिज्ञों को उन्होंने ऐसा बल्ला और गेंद भी पकड़ा दिया कि वे भविष्य में वाद-विवाद रूपी विषम बैट -बाल का खेल खेलते रहेंगे ।इस योगदान के लिए भी उन्हें याद किया जायगा । भारतरत्न चयन समिति को चाहिए कि अपनी भूल ठीक करते हुए ,आज की स्थिति में पहुँच चुके मानकों के सन्दर्भ में ,श्री अटल विहारी बाजपेयी ,स्व ध्यान चन्द व अन्य ऐसे विशिष्ट ब्यक्तियों को फटाफट भारत रत्न देदे ताकि वर्तमान विवाद को विराम लगे । भारतीयों को आवश्यक और अनावश्यक बोझ ढोने की आदत है । वे सभी भारतरत्नों को याद करेंगे और अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाएंगे । जब मानकों की बात उठेगी ,भारत के भाग्य विधाता लोग इतिहास -भूगोल बदलने की बात उठा देंगे ।स्वागत

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

क्या करियेगा..................................लग रहा है पूरा का पूरा भारतीय समाज चेतनहीन हो गया है...............ऐ आदम की औलादों इंसान बनो , जिस मातृभूमि पे जन्म लिया, उसका सम्मान बनों; प्राणी तो हर प्राणी है, इंसान नहीं है , तू भी तो इंसान है कोई शैतान नहीं है; फिर क्यों तेरे दिमाग में शैतानियत छाई, जिसने तेरा इंसानियत में आग लगायी. आखिर कब तक चलेगा ये आपस की लड़ाई, अब बंद करो खून की होली मेरी भाई; मत बनो एक दुसरे के खून के प्यासें, बहुत मिली चुकी मिट्टी में निर्दोषों की लाशें. एक दुसरे को जानो इंसानियत को पहचानों, आपस का झगडा छोडो इस मिट्टी की बात मानों; बहुत हो चूका अब मत कर अपने धर्मों का अपमान, इंसानियत के लिए बन दो जिश्म वो एक जान . अल्लाह ने इंसान को इंसान बनाया, वो तू ही है जो इंसान को शैतान बनाया; तेरे ही कारन लाखों घर बर्बाद हुआ है जिससे तू आज शैतान हुआ है. अनिल कुमार 'अलीन'

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

आदरणीय मंगल जी, आप के सुझाव अत्यंत मौलिक, विचारणीय और राजशाही के विपरीत लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल हैं, जिन्हें स्वीकारने से हमारे लोकतंत्र की चेतना सद्दिशा की ओर ही बढ़ेगी-- "जब प्रथम भवन से लोकतंत्र के साथ सामंजस्य बैठाते प्रोटोकाल की शुरुआत हो ही गई है तो सर्वप्रथम चर्चा राष्ट्रपति शब्द पर होनी चाहिए। यह शब्द किसी भी तरह प्रेसीडेन्ट का समानार्थी नहीं है। पति शब्द सदैव दम्भ एवं स्वामित्व का बोध कराता है और स्वयं को पति कहलाना अपने दम्भ एवं स्वामित्व भाव पर मुहर लगवाता है। शिष्टाचार की कसौटी पर किसी एक का पति होना अच्छी बात है परन्तु कईयों का पति होना बुरी बात है- ठीक वैसे ही जैसे किसी एक की पत्नी होना अच्छी बात है परन्तु बहुतों की पत्नी होना बहुत ही बुरी बात है। समय आ गया है कि भारतीय लोकतंत्र के प्रथम नागरिक अपने को देशपाल, भारतपाल, प्रथम सेवक, राष्ट्र सेवक, राष्ट्राध्यक्ष या प्रेसीडेन्ट कुछ भी कहलायें परन्तु राष्ट्रपति शब्द को निरस्त करें। इसी प्रकार राष्ट्रपति-भवन के लिए देश निवास, भारत-भवन, प्रथम-भवन, प्रेसीडेंट हाउस जैसे समानार्थी किसी संबोधन को मान्यता दें ताकि भारत में एक नई लोकशाही धारा प्रेसीडेन्ट हाउस से निकले। इस विषय पर राजभाषा में एक राष्ट्रब्यापी चर्चा चला कर सूरज को पूरब में उगते देखा जा सकता है।" उचित समय पर इतने मौलिक और उचित विचार के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria




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